एक प्रखर वक्ता, समाजसेवी, एक प्रभावी राजनेता, सहकारिता मित्र, उन्नत कृषक और पेशे से वकालत करने वालेका व्यक्तित्व अपने आप में कई ज्वलंत अनुभवों का लिखित दस्तावेज़ है। वर्तमान में मध्य प्रदेश कांग्रेस के मंत्री श्री सज्जन सिंह वर्मा जी का जन्म १९७२ में देवास के एक धार्मिक, संपन्न किसान व शिक्षित परिवार में पिता श्री एवं माता श्रीमति के घर हुआ। आपका विवाह श्रीमती से १९९१ में सम्पन्न हुआ। श्री पवन वर्मा आपके सुपुत्र हैं।
वर्मा बाल्यकाल से ही स्वामी विवेकानंद,जैसे महान राष्ट्रभक्तों के जीवनकार्यों से प्रेरणा प्राप्त करते हुए विशेष रूप से कांग्रेस विचारधारा की से प्रभावित हुए तथा वे एक सक्रिय सेवक बन गए। आपको समाज सेवा की प्रेरणा बचपन से ही विरासत में मिली, अतः बढ़ती आधुनिकता के इस दौर में भी आपने मानव समाज के प्रति अपने दायित्वों को समझते हुए अपना जीवन जनसेवा एवं देशसेवा हेतु समर्पित करने का निश्चय किया एवं कांग्रेस में नेतृत्व की प्रभावशाली यात्रा की और उन्मुख हुए। अतः बढ़ती आधुनिकता के इस दौर में भी आपने मानव समाज के प्रति अपने दायित्वों को समझते हुए अपना जीवन जनसेवा एवं देशसेवा हेतु समर्पित करने का निश्चय किया एवं कांग्रेस में नेतृत्व की प्रभावशाली यात्रा की और उन्मुख हुए।
एक थे लाल और एक थे बापू ,
कहाँ हैं अब ऐसे लाल और बापू ,
दोनों ने जीवन ,सर्वस्व किया ,नौछावर ,
अपनी इस जननी की खातिर ,
आओ मिलकर दिया जलाएं ,
जन्मदिन उनका मनाएँ ,
सुख ,समृधि का जो देखा उन्होंने सपना ,
उसको पूरा करने का क्योँ न ले प्रण अपना |
प्यारे बापू प्यारे शास्त्री जी ,
धन्यभाग हमारे ,
जो हम इस धरती पर आए ,
जहां ऐसे कर्णधार हमने हैं पाये |
अपने कर्मठ अमर सपूतों को ,
उनके पसीने की एक एक बूंदों को
क्योँ न याद करे हम दोनों को ,
भावबिह्वलहोकर दोनों को
इस धरा के अमर सपूतों को ,
एक ने बोला जय जवान -जय किसान ,
दूसरे बोले रघुपति राघव राजा राम
दोनों की थी एक ही बोली ,
देश हमारा खेले होली(रंगों की),
क्योँ न बोलें हम ये आज ,
भारत ,बन जाए हम सबकी शान
एक थे लाल और एक थे बापू ,
कहाँ हैं अब ऐसे लाल और बापू ,
दोनों ने जीवन ,सर्वस्व किया ,नौछावर ,
अपनी इस जननी की खातिर ,
आओ मिलकर दिया जलाएं ,
जन्मदिन उनका मनाएँ ,
सुख ,समृधि का जो देखा उन्होंने सपना ,
उसको पूरा करने का क्योँ न ले प्रण अपना |
प्यारे बापू प्यारे शास्त्री जी ,
धन्यभाग हमारे ,
जो हम इस धरती पर आए ,
जहां ऐसे कर्णधार हमने हैं पाये |
अपने कर्मठ अमर सपूतों को ,
उनके पसीने की एक एक बूंदों को
क्योँ न याद करे हम दोनों को ,
भावबिह्वलहोकर दोनों को
इस धरा के अमर सपूतों को ,
एक ने बोला जय जवान -जय किसान ,
दूसरे बोले रघुपति राघव राजा राम
दोनों की थी एक ही बोली ,
देश हमारा खेले होली(रंगों की),
क्योँ न बोलें हम ये आज ,
भारत ,बन जाए हम सबकी शान
भारत दुनिया के सबसे प्रदूषित देशों में से एक है। प्रदूषित हवा संबंधी बीमारियों की वजह से यहां एक साल में करीब 12 लाख लोग असमय मर जाते हैं। स्टेट ग्लोबल एयर 2019 की रिपोर्ट के मुताबिक प्रदूषित हवा की वजह से वैश्विक स्तर पर आयु औसतन 1 साल 8 महीने कम हो गई। हवा में प्रदूषण पार्टिकल्स की अधिकता है। ऐसे में फेफड़ों का कैंसर, शुगर, हार्ट अटैक व स्ट्रोक जैसी बीमारियां बढ़ती जा रही हैं। लोग इलेक्ट्रॉनिक एयर प्यूरिफायर इस्तेमाल कर शुद्ध हवा लेने की कोशिश करते हैं लेकिन जरूरत पेड़ों की है, जो अपने आप में नैचुरल प्यूरिफायर हैं। हमारे पर्यावरण में कुछ ऐसे इनडोर पौधे भी मौजूद हैं, जो किसी एयर प्यूरिफायर से कम नहीं, खुद नासा ने इस बात को माना है।
पर्यावरण दिवस के मौके पर दैनिक भास्कर प्लस एक्सपर्ट के माध्यम से बता रहा है ऐसे पौधों से जुड़ी जानकारी…
भारत दुनिया के सबसे प्रदूषित देशों में से एक है। प्रदूषित हवा संबंधी बीमारियों की वजह से यहां एक साल में करीब 12 लाख लोग असमय मर जाते हैं। स्टेट ग्लोबल एयर 2019 की रिपोर्ट के मुताबिक प्रदूषित हवा की वजह से वैश्विक स्तर पर आयु औसतन 1 साल 8 महीने कम हो गई। हवा में प्रदूषण पार्टिकल्स की अधिकता है। ऐसे में फेफड़ों का कैंसर, शुगर, हार्ट अटैक व स्ट्रोक जैसी बीमारियां बढ़ती जा रही हैं। लोग इलेक्ट्रॉनिक एयर प्यूरिफायर इस्तेमाल कर शुद्ध हवा लेने की कोशिश करते हैं लेकिन जरूरत पेड़ों की है, जो अपने आप में नैचुरल प्यूरिफायर हैं। हमारे पर्यावरण में कुछ ऐसे इनडोर पौधे भी मौजूद हैं, जो किसी एयर प्यूरिफायर से कम नहीं, खुद नासा ने इस बात को माना है। प्रदूषित शहरों में शुद्ध हवा का जरिया है सबसे बेहतरीन जरिया है इनडोर पौधे |
पर्यावरण दिवस के मौके पर दैनिक भास्कर प्लस एक्सपर्ट के माध्यम से बता रहा है ऐसे पौधों से जुड़ी जानकारी…
बी – 10 चार इमली भोपाल मध्यप्रदेश, भारत
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